Thursday, November 12, 2009

"कामना और प्रयास"

*कामना -जो हम चाहते हैं उस चाहत को पुरा करने के लिए जो प्रयत्न है और उसके अनुसार जब परिणाम नहीं आ पाते हैं तो साल या समय गुजरने के बाद वह थकान में बदल जाता है ।
* चाहनाओं की जगह हम सब एक हैं।
लेकिन उस कामनाओं को पुरा करने के लिए हमारे पास क्या योजनाएँ हैं?
*और यदि हम जैसा चाहते हैं वैसा नहीं आ रहें हैं तो उसके लिए कोई सोचने का विधिवत तरीका होगा?
ऐसा हम चाहते हैं।
और हमारी कामनाएं क्या है?

3 comments:

  1. सर्वप्रथम आपको बधाई! की आपने जीवन-विद्या नाम से विचारोत्तेजक लेखमाला की शुरुवात की है.
    जिन विषयों पर मैंने पूर्व में कुछ शोध किये हैं और वर्तमान में शोधरत हूँ, आपके लेख में कुछ समान वक्तव्य को पाकर प्रसन्नता मिली है.
    अपने विचारों को यहाँ खुलकर और विस्तृत लिख सकते हैं. मेरी शुभकामनाएं हैं!!

    अपना पोस्ट-ईमेल फीड सक्रिय (Setting Enable) कर लें तो पाठको को नयी पोस्ट पढने में सुविधा होगी.

    सुलभ

    ReplyDelete
  2. कामना के पश्चात, मध्य में योजनाओं के जगह और परिणाम के समय स्थितियां विभिन्न होती है. व्यक्ति-दर-व्यक्ति, सोच दर सोच और परिस्थितियाँ दर परिस्थितियाँ विभिन्न स्थितियों का मानसिक आंकलन भी भिन्न भिन्न होता है.
    (I mean to say every person thinks differently after each and every effects of previous and current situation.) वस्तुतः किसी भी मोड़ पर मध्य या अंतिमपड़ाव पर जहाँ व्यक्ति प्रयासों(प्रयास जिसकी लम्बाई कभी निश्चित नहीं हो सकती) के पश्चात परिणाम से मिलन की कामना करता है. वहां सयंत रहने की जरुरत है. यह तभी संभव है जब हम शुरुवात में ही प्राप्ति की ख़ुशी और न प्राप्ति के थकान इन दोनों के मध्य की दूरी का आंकलन कर लें. फिर जो भी योजनायें और प्रयत्न होंगे वे हमे थकान से राहत देने वाले होंगे और राहत की स्थिति में मनोबल (आत्मबल) महत्तम उंचाई का स्पर्श करेगा.

    (यहाँ जो भी लिखा हूँ आपकी जानकारी से सहमत होने और पूर्व में अपने अनुभव के आधार पर लिखे गए साम्य विषय से सम्बंधित होने पर ही लिखा हूँ. इस टिपण्णी को कृपया अन्यथा न लेंगे)

    - सुलभ

    ReplyDelete
  3. I am very happy to know that u r also interested in this topic.

    सतरंगी जी इस विषय को अभी मै बहुत ही सरल शब्दों में समझाने की कोशिश कर रही हूँ यह सब शिविर का ही हिस्सा है.
    "कामना और प्रयास " यह विषय इसलिए उठाया गया है कि इससे मानव यह जान सके की उसकी कामना क्या है?
    हम जानते हैं कि इस संसार में सभी मानव की कामना "सुख,शांति,संतोष,और आनंद " प्राप्ति ही है. पर इनकी परिभाषा अपने तरीके से कैसे करता है? और क्या वह इन्हें निरंतर प्राप्त कर पाता है? वह इन्हें कहाँ तलाश करता है? यह बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसे आगे जाकर बताया जायेगा.
    हमें आपकी टिपण्णी बहुत ही सार्थक लगी.
    धन्यवाद.

    ReplyDelete