
=> एक तो पदार्थ अवस्था मात्रा से नियंत्रित है ।
=> दूसरा प्राण अवस्था है जहाँ कोशिकाएं श्वसन करती हैं (भौतिक रासायनिक क्रियायें)। यह बीज परम्परा से नियंत्रित है ।
=> जीव अवस्था जिसमें सारे जीव आते हैं। यह वंश परंपरा से नियंत्रित है।
=> ज्ञान अवस्था जिसमें केवल मानव आते हैं। यह संस्कार परंपरा से नियंत्रित है।
H2 + O2--> 2H2O
हम जानते हैं कि H2 (हाइड्रोज़न) और O२(ऑक्सीजन) का जो सयोंग है एक निश्चित विधि से सयोंग है वह पानी है एक रासायनिक प्रक्रिया है।
ये जो globing warming है इतनी तेजी से बदल रही है कि जो पानी को पानी रहने के लिए जैसा वातावरण चाहिए अगर वैसा नही मिले तो यह प्रक्रिया पलट सकती है।
ऐसी परिस्थिति जरूर बन सकती है जिस प्रकार मानव जी रहा है।
ध्यान दीजिये जब किसी चुम्बक को गर्म किया जाए तो क्या होगा उत्तर आएगा की चुम्बकीय प्रभाव नष्ट हो जाएगा।
और हम इस बात को स्वीकारते हैं कि धरती भी एक बड़ा चुम्बक है अब यदि globle warming( ग्लोबल वार्मिंग )इस तरह बढ़ती रहे और किसी स्तर को यह पर कर जाए तो इस धरती रूपी चुम्बक का क्या होगा ?
पहले इस बारे में बात करने की जरुरत नहीं थी पर अब क्यों? क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग तेजी से बढ़ रहा है।
स्टीफन हॉकिन्स ने कहा है जिस तरह से आदमी धरती पर जी रहा है उसकी अधिकतम आयु १०० साल या ५० साल हो सकती है और आदमी को कोई दूसरा ग्रह तलाश लेना चाहिए जहाँ वह स्थान्तरित हो सके। "
स्थान्तरित होने वाले कौन होंगे ? सभी हो पाएंगे क्या?
कौन कौन हो पायेगा? जिसके पास धन होगा!
**तात्पर्य यह है कि आदमी के द्वारा जो प्रकृति को नुकसान पहुँचाने का फैलाव है, हजारों लोग कि मृत्यु हो जाए यह उतनी बड़ी घटना नहीं है क्योंकि आदमी फ़िर से पैदा होता है उसकी भरपाई हो जायेगी लेकिन ये धरती आदमी के रहने लायक ही नहीं बचेगी तब एक महत्वपूर्ण समस्या आ खड़ी होगी।
क्या यह धरती मानव के रहने लायक बच पायेगी?
3 comments:
महत्वपूर्ण समस्या
EK ACCHA SWAAL AAPNE KIYA HAI
बहुत अच्छी और सार्थक जानकारी...धन्यवाद आपका...
नीरज
संजय जी और नीरज जी आप सभी का शुक्रिया...
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